संदेश

🌹कन्हैया से प्रेम🌹

नंद के लाल से मै तो , प्रेम करता कन्हैया से॥  गीत राधे के गाता मै ,  मिलाती है कन्हैया से॥ नंद के गाँव की गाये ,  प्रेम करती कन्हैया से॥ मौन हो तान सुनती है ,  बांसुरी की कन्हैया से॥  नगर की गोपीया सारी ,  प्रेम करती कन्हैया से॥  ठिठोली भी करे सारी गोपिया तो कन्हैया से॥ अनूठा प्रेम है देखो,  गोपियो का कन्हैया से॥  प्रेम करलो सभी तुम भी यशोदा के कन्हैया से॥  मिलेगी छाछ पीने को ,  हमे प्यारे कन्हैया से॥  दही के संग मक्खन भी ,  मिलेगा जी कन्हैया से॥  नमन करता सभी को मै ,  प्रेम करलो कन्हैया से॥ नंद के लाल से तुम भी,  प्रेम करलो कन्हैया से॥  नंद के लाल से मै तो,  प्रेम करता कन्हैया से॥  कॉपीराइट © भीकम जांगिड़ कवि भंयकर कॉपीराइट © भीकम जांगिड़ कवि भंयकर

🌹पहलगाम आतंकवादी घटना🌹

 खून खराबा होता है तो                      ऐक बार हो जाने दो रोज रोज के इस झगड़े का                      अब निपटारा होने दो ऐक महाभारत फिर से अब                      पाक धरा पर होने दो गगन धरा थर्रा कर डोले                       युद्ध आखरी होने दो शिव शंकर का ताण्डव फिर से                       पाक धरा पर होने दो याद रखेगा विश्व युगो तक                महाभारत फिर लिखने दो भड़क रहे जो शोले दिल मे                   लपट आग की उठने दो जिनको डर लगता भारत मे                    पाक जमी पर जाने दो मोदी जी अब मौन तोड़ दो                   ...

🌹मल्लेच्छो से आज बचालो लो मछली को🌹

🌹स्वयंवर प्रथा का समर्थन🌹 उड़ने दो रे नवजात परिंदो को।  छूने दो रे आसामान आजाद परिंदो को ।। लोट के आयेंगे सुनहरी शामो को। तोड़ दो रे आज उन्हे जो बंद करे उन पिंजरो को।। आज बनाने दो रे नीड़ अपना उनको। गौरया के संग करो नर गौरया को ।। उड़ने दो रे सारस सी उस जोड़ी को। अपनो के संग उड़ने दो रे चिरैया को।। तोते के संग आज करो तुम मैना को। चुनने दो मन मीत आज तुम मैना को॥  गुलशन के फूलो की खुशबू तो पाने को॥ मण्डराने दो रे रंगबिरंगी तितली को ।। बाजो से तो आज बचालो चिड़िया को । कौओ के संग जाने ना दो कोयल को ।। मल्लेच्छो से आज बचालो मछली को । आज बचा लो रे तुम सोन चिरैया को ।। हिन्दू संग कर दो हिन्दू पुत्री को ॥ चुनने दो वर हिन्दू अपना अब उसको ॥  उडने दो रे नव जात ------ कॉपीराइट © भीकम जांगिड़ कवि भयंकर

🌹बसंत पंचमी वाणी पूजन🌹

 चाह नही मयुरासन पर             मै बैठ कभी पूजा जाऊ चाह ऐक बस मात शारदे              वरद हस्त मै तेरा पाऊ सदा रहूँ चरणो मे तेरे              मै तेरा ही ध्यान लगाऊ गीत कविता छंद पढ़ू तो           शब्द कोई मै भूल ना पाऊ लाज बचाना मात शारदे            मै मंचो पर जब भी जाऊ ऐसी मेधा शक्ति दे दो            शब्द पुष्प मै तुम्हे चढ़ाऊँ गूंगा गाये पंचम स्वर मे             वर ऐसा मै तुम से पाऊ कंठ सुरिला मुझको दे दो           वीणा पाणी शीश झुकाऊं जब भी गाऊँ गीत शारदे            गीत आपके ही तो गाऊँ मात शारदे मात शारदे              मात शारदे ही मै गाऊँ कॉपीराइट © भीकम जांगिड़ कवि भयंकर

🌹वीर वधू की पीड़ा राजस्थानी मे🌹

म्हारी घुळगी आंसू मे काजळ रेख ,आंख्या मे आंसू नाय रुके॥  म्हारी घुळगी आंसू मे काजळ रेख ,आंख्या मे आंसू नाय रुके॥  ओढ़ तिरंगो घर थे आया , नेता आंसू आया॥ द्वि वारम्॥  कुटुंब कबिलो रोवण लाग्यो , झुकियो तिरंगो थारे मान ,  आंख्या मे आंसू नाय रुके ॥ म्हारी घुळगी॥ आंख्या मे॥  नांका वाळी नथणी उतरी चूड़ी टूटी आज॥ द्वि वारम्॥  टीकी म्हारी पूछ दी रे मांग घुळी रे लटिया माय॥  आंख्या मे आंसू नाय रुके॥ म्हारी घुळगी॥ आंख्या मे॥  हाथा वाळी मेहंदी छूटी लाड़ल रोवे आज॥ द्वि वारम्॥  लाड़ल ने परणाया बिन क्यू , छोड़ दियो जी म्हारो साथ॥  आंख्या मे आंसू नाय रुके॥ म्हारी घुळगी॥ आंख्या मे॥  टाबर थारा बिलख्या फिरसी बिन बापू के आज॥ द्वि वारम् या का कुण तो लडासी अब तो लाड ,  आंख्या मे आंसू नाय रुके॥ म्हारी घुळगी॥ आंख्या मे॥  बहेनड़ थारी झुर झुर रोवे , नदिया नेण बणाय॥ द्वि वारम्॥  या तो कुण के बांधेली राखी आज ,  आंख्या मे आंसू नाय रुके॥ म्हारी घुळगी॥ आंख्या मे॥  मात पिता थारा दोन्यू रोवे सागर नेण बणाय॥ द्वि वारम्॥  ऐ तो रो सी उमर भर ...

🌹शृंगार रस🌹

                 (1)  🌹तुम भूल मुझे क्यू जाती हो🌹 मै याद करू तुमको फिर भी                 तुम भूल मुझे क्यू जाती हो सपनो मे देखू तुमको पर                     नजर नही तुम आती हो मै जलता सा दीपक हूँ                तुम उस दीपक की बाती हो मै सपने नये सजाता हूँ                   तुम ही सपनो की रानी हो आसमान का मै पंछी हूँ                  तुम उसकी ऐक कहानी हो मै आवारा इक बादल हूँ                      तुम बूंद बूंद सी पानी हो लिखु प्यार के छंद सुनो                 तुम हर दिल ऐक जुबानी हो मै याद करू तुमको फिर भी                   तुम भूल मुझे क्यू जाती हो    कॉपीराइट © भीकम जांगि...

🌹मन का अवसाद रचना 1🌹

 प्रेम रस ही सदा मैने              तुम्हे ही तो पिलाया है गमो का जहर ही तूने            सदा मुझको पिलाया है अमिरष का रहा प्यासा             सदा विष ही पिलाया है प्यार के नाम पर हरदम              क्रोध अपना दिखाया है तीर चुभते शब्द का ही                     सदा तूने चलाया है सुरीले गीत के बदले                सदा दिल को जलाया है प्रेम से बोल कर मैने                 सदा तुमको हंसाया है बोल कड़वे बोल कर के                  सदा मुझको रुलाया है गीत मैने सदा तुमको                    प्रेम का ही सुनाया है विषेली जीभ से तूने                     गीत मेरा जलाया है पुष्प के बाण के बदले   ...