संदेश

🌹आध्यात्मिक रचना 🌹

 क्या लेकर आया रे मानव               किस चिंता मे आज पड़ा अंतिम सत्य यही जीवन का               चिता भूमि मे आज पड़ा जीवन तो तपते सूरज सा               हर प्राणी तपता रहता है इच्छाओ के लाक्षागृह मे             हर मानव जलता रहता है जीवन तो रण कुरूक्षेत्र है                    अपनो की बाधाएं है अपनो की इन बाधाओ से                  अर्जुन सा तू लड़ता है जीवन द्रोण चक्रव्यूह जैसा                   हर प्राणी फंस जाता है श्री कृष्ण का नाम जपे तो                   भव से नर तर जाता है धूप छाँव सा ये जीवन है                  संघर्षो से भरा हुआ है जो होना है वह होता है                   ...

🌹नेता जी को भारत दर्शन 🌹

 🌹मनहरण घनाक्षरी छंद 🌹 वोट मांगने को जो भी,नेता घर आते है तो, आईने मे चेहरा तो,उनको दिखाईये॥ इतने बरस कैसे,भूल गये आप हमे, आज कैसे याद आई,हमे तो बताईये॥ आये हुए नेताओ से,आप जरा पूछीये जी, किये हुए अच्छे काम,हमे तो बताईये॥ कुछ साल पहले थी,जो साईकिल आपकी, आज कहाँ पड़ीजरा,हमे तो बताईये॥  बिच्छू नाम धारी गाड़ी,कीमते है भारी फिर, किस विधी लाये आप,हमे तो बताईये॥ ऐक छोटा घर था जी,छोटे से ही गाँव मे तो, कैसे बनी होटले जी,हमे तो बताईये॥ आये हुए नेताओ को,गाँवो की शहरो वाली, बस्तिया भी थोड़ी सी तो,आप दिखलाईये॥ नगरो के बीच वाली,बस्तीयो मे टूटी फूटी, सड़के तो नेताजी को,आप दिखलाईये॥ कचरे का ढेर चारो,ओर लगा हुआ है जो, बह रहा सड़को पे,पानी भी दिखाईये॥ चारो ओर घास उगी ,मच्छरो का जोर यहाँ, कांगरेस घास पूस,उनको दिखाईये॥  खुली है जो नालीयो मे ,गिरता है कचरा भी, नालीयो मे रुका हुआ,कीचड़ दिखाईये॥ कच्ची बस्तीयो के बीच ,फैल रहा कीचड़ है, रोशनी से हीन घर,उनको दिखाईये॥ पीने को तो पानी नही,टूटा हैण्डपम्प ऐक, खाली गागरी की आज,कतारे दिखाईये॥ गाँवो की जो सड़के है,शहरो को ही जोड़ती, नेताओ की कारे जरा...

🌹विश्वकर्मा जी की स्तुति 🌹

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श्री विश्वकर्मा जी प्रभो              सबको शरण मे लीजिये पूजनीय आप सबके                भाव उज्झवल कीजिये भावनाये शुद्ध सबकी                    आप ही कर दीजिये शरण मे हम आपके                 आशीष हमको दीजिये निर्माण के हो देवता                    सारी कलाये दीजिये सृष्टि के निर्माण का                  आधार हमको कीजिये अर्थ वेद पढ़े सभी                 यह ज्ञान हमको दीजिये वेद की बोले ऋचाएँ                         यज्ञ कर्ता कीजिये यज्ञ की सुगंध से                  जीवन सुगंधित कीजिये ब्रह्म कर्म करे सभी                 प्रकाण्ड पण्डित कीजि...

🌹राजस्थानी भाषा पर्यावरण संदेश🌹

 🌹राजस्थानी भाषा पर्यावरण संदेश🌹 हरिया रूख तो मत काटो रे                   थे खुद भी मिट जाओला डूंगर ने मत रेत करो रे                         रेत रेत हो जाओला डूंगर रेत रेत हो जासी                   थे खुद ही  पछताओला बिन डूंगर नदिया नही रहसी                      तिरसाया मर जाओला हरिया रूख तो मत काटो रे                        धरा मरू हो जावेला नदिया सूखी प्यासी धरती                        शाख कठा सू पावोला बिन नदिया के पाणी के तो                      ऐक रूख नही पाओला बिना रूखड़ा के तो भाया                       छाया भी नही पाओला सूरजड़ो आकाश तपसी ...

🌹खण्डित भारत की पीड़ा 🌹

मै देश विभाजन की पीड़ा का                            ही तो वो सम्बोधन हूँ मै बटवारे की पीड़ा का ही                             तो मै वो सम्बोधन हूँ मै खण्डित भारत की पीड़ा का                             ही तो वो सम्बोधन हूँ मै तड़प रही भारत माता की                             पीड़ा का सम्बोधन हूँ उसने गांधी को क्यो मारा                         मै आज तुम्हे बतलाता हूँ जो वचन दिया जिस जिह्वया ने                     वह जिह्वया ही तो बदल गई ना गौ हत्याऐ बंद हुई                             ना मधुशालाऐ बंद हुई जब कटी भुजाएँ भारत की   ...

🪱जहरीली नागिन 🪱

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 भरी हो जहर से नागिन                 लपा लप जीभ करती हो जन्म देती संपोलो को                   घूंट विष की पिलाती हो लपेटे पूंछ मे अग्नि                    घरो को ही जलाती हो मारती फूंक भी जब तुम                   हवा विष की बनाती हो गड़ा कर दांत जहरीले                       सभी को मार देती हो घरो की शाख को ही तो                      रेत मे तुम मिलाती हो जहर सब को पिला कर के                        मौत की नींद देती हो कलम की धार पर ही तुम                      पलट कर वार करती हो कवि के नाम को ही तो                       सदा बदनाम करत...

🌹प्रारंभिक सम्मान 🌹

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      🌹गणेश जी माँ शारदे को नमन🌹         🌹मंच ऐवं श्रोताओ को नमन🌹 गजानंद को नमन मेरा                    शरण मे तो सदा रखना शारदे को नमन मेरा                         मुझे आशीष तो देना सदा शिव के ही चरणो मे                      झुकाऊं शीश मै अपना फूल शब्दो के मेरे संग                     आप सब भी चढ़ा देना कवि तो नाम है शिव का                    आप सब जान भी लेना नमन शिव को करू मै तो                   नमन सब आप भी करना नमन है मंच को भी तो                          मुझे आशीष दे देना कलम से चूक हो कोई                     मुझ...