⚔️हठ धर्मिता पर आक्रोश ⚔️
संघ के विधान को जो कोई नही मानते तो
नियम कानून के ही अपराधी मानिए॥
करके सभा मे शोर बाधाये जो डालते है
गुण्डो वाली टोलिया है आप जान लीजिए॥
मान भंग करते है अपने बुजुरगो का
संसकार हीन सारी पीढ़ी जान लीजिए॥
जहर भरी है पीढ़ी सांप के संपोलो जैसी
ऐडीया रगड़ फन आप तो कुचलिये॥
विष दंत मोटे मोटे आप देख लीजिए जी
जहर भरे है सारे दांत तोड़ दीजीये॥
पूछ को पकड़ कर हवा मे घुमाईये जी
नियम कानून वाली पोथीया पढ़ाईये॥
संघ के विधान का तो पालन कराईये जी
पालन जो करे नही जैल भिजवाईये॥
विष से है भरे सारे घड़े फोड़ डालिये जी
न्यायालय से इन को तो सजा दिलाईये॥
कॉपीराइट © भीकम जांगिड़ कवि भयंकर
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