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🌹बसंत पंचमी वाणी पूजन🌹

 चाह नही मयुरासन पर             मै बैठ कभी पूजा जाऊ चाह ऐक बस मात शारदे              वरद हस्त मै तेरा पाऊ सदा रहूँ चरणो मे तेरे              मै तेरा ही ध्यान लगाऊ गीत कविता छंद पढ़ू तो           शब्द कोई मै भूल ना पाऊ लाज बचाना मात शारदे            मै मंचो पर जब भी जाऊ ऐसी मेधा शक्ति दे दो            शब्द पुष्प मै तुम्हे चढ़ाऊँ गूंगा गाये पंचम स्वर मे             वर ऐसा मै तुम से पाऊ कंठ सुरिला मुझको दे दो           वीणा पाणी शीश झुकाऊं जब भी गाऊँ गीत शारदे            गीत आपके ही तो गाऊँ मात शारदे मात शारदे              मात शारदे ही मै गाऊँ कॉपीराइट © भीकम जांगिड़ कवि भयंकर

🌹वीर वधू की पीड़ा राजस्थानी मे🌹

म्हारी घुळगी आंसू मे काजळ रेख ,आंख्या मे आंसू नाय रुके॥  म्हारी घुळगी आंसू मे काजळ रेख ,आंख्या मे आंसू नाय रुके॥  ओढ़ तिरंगो घर थे आया , नेता आंसू आया॥ द्वि वारम्॥  कुटुंब कबिलो रोवण लाग्यो , झुकियो तिरंगो थारे मान ,  आंख्या मे आंसू नाय रुके ॥ म्हारी घुळगी॥ आंख्या मे॥  नांका वाळी नथणी उतरी चूड़ी टूटी आज॥ द्वि वारम्॥  टीकी म्हारी पूछ दी रे मांग घुळी रे लटिया माय॥  आंख्या मे आंसू नाय रुके॥ म्हारी घुळगी॥ आंख्या मे॥  हाथा वाळी मेहंदी छूटी लाड़ल रोवे आज॥ द्वि वारम्॥  लाड़ल ने परणाया बिन क्यू , छोड़ दियो जी म्हारो साथ॥  आंख्या मे आंसू नाय रुके॥ म्हारी घुळगी॥ आंख्या मे॥  टाबर थारा बिलख्या फिरसी बिन बापू के आज॥ द्वि वारम् या का कुण तो लडासी अब तो लाड ,  आंख्या मे आंसू नाय रुके॥ म्हारी घुळगी॥ आंख्या मे॥  बहेनड़ थारी झुर झुर रोवे , नदिया नेण बणाय॥ द्वि वारम्॥  या तो कुण के बांधेली राखी आज ,  आंख्या मे आंसू नाय रुके॥ म्हारी घुळगी॥ आंख्या मे॥  मात पिता थारा दोन्यू रोवे सागर नेण बणाय॥ द्वि वारम्॥  ऐ तो रो सी उमर भर ...

🌹शृंगार रस🌹

                 (1)  🌹तुम भूल मुझे क्यू जाती हो🌹 मै याद करू तुमको फिर भी                 तुम भूल मुझे क्यू जाती हो सपनो मे देखू तुमको पर                     नजर नही तुम आती हो मै जलता सा दीपक हूँ                तुम उस दीपक की बाती हो मै सपने नये सजाता हूँ                   तुम ही सपनो की रानी हो आसमान का मै पंछी हूँ                  तुम उसकी ऐक कहानी हो मै आवारा इक बादल हूँ                      तुम बूंद बूंद सी पानी हो लिखु प्यार के छंद सुनो                 तुम हर दिल ऐक जुबानी हो मै याद करू तुमको फिर भी                   तुम भूल मुझे क्यू जाती हो    कॉपीराइट © भीकम जांगि...

🌹मन का अवसाद रचना 1🌹

 प्रेम रस ही सदा मैने              तुम्हे ही तो पिलाया है गमो का जहर ही तूने            सदा मुझको पिलाया है अमिरष का रहा प्यासा             सदा विष ही पिलाया है प्यार के नाम पर हरदम              क्रोध अपना दिखाया है तीर चुभते शब्द का ही                     सदा तूने चलाया है सुरीले गीत के बदले                सदा दिल को जलाया है प्रेम से बोल कर मैने                 सदा तुमको हंसाया है बोल कड़वे बोल कर के                  सदा मुझको रुलाया है गीत मैने सदा तुमको                    प्रेम का ही सुनाया है विषेली जीभ से तूने                     गीत मेरा जलाया है पुष्प के बाण के बदले   ...

🌹अंतिम अभिलाषा🌹

🌹मृत्यु से पहले 🌹 जिस दिन मै दुनिया छोडुंगा                   तुम याद दिलो रखलेना मेरी हर गलती को यारो                 माफ सभी तुम कर देना मेरी लाश पर आकर के तुम                  पुष्प उसी पर रख देना अंत समय पर मेरी लाश को                     कंधा सभी लगा देना कसम तुम्हे है मेरी यारो                  आंख मे आंसू मत लाना प्रेरक जीवन जो था मेरा                    छांट उसे तुम रख लेना मेरी मौत का यारो सब तुम                       थोड़ा जश्न मना लेना ढोल बजाते खुशी मनाते                   हंसकर विदा मुझे करना यही तमन्ना अंत समय की                     आप सभी पूरी करना...

🌹आध्यात्मिक रचना 🌹

 क्या लेकर आया रे मानव               किस चिंता मे आज पड़ा अंतिम सत्य यही जीवन का               चिता भूमि मे आज पड़ा जीवन तो तपते सूरज सा               हर प्राणी तपता रहता है इच्छाओ के लाक्षागृह मे             हर मानव जलता रहता है जीवन तो रण कुरूक्षेत्र है                    अपनो की बाधाएं है अपनो की इन बाधाओ से                  अर्जुन सा तू लड़ता है जीवन द्रोण चक्रव्यूह जैसा                   हर प्राणी फंस जाता है श्री कृष्ण का नाम जपे तो                   भव से नर तर जाता है धूप छाँव सा ये जीवन है                  संघर्षो से भरा हुआ है जो होना है वह होता है                   ...

🌹नेता जी को भारत दर्शन 🌹

 🌹मनहरण घनाक्षरी छंद 🌹 वोट मांगने को जो भी,नेता घर आते है तो, आईने मे चेहरा तो,उनको दिखाईये॥ इतने बरस कैसे,भूल गये आप हमे, आज कैसे याद आई,हमे तो बताईये॥ आये हुए नेताओ से,आप जरा पूछीये जी, किये हुए अच्छे काम,हमे तो बताईये॥ कुछ साल पहले थी,जो साईकिल आपकी, आज कहाँ पड़ीजरा,हमे तो बताईये॥  बिच्छू नाम धारी गाड़ी,कीमते है भारी फिर, किस विधी लाये आप,हमे तो बताईये॥ ऐक छोटा घर था जी,छोटे से ही गाँव मे तो, कैसे बनी होटले जी,हमे तो बताईये॥ आये हुए नेताओ को,गाँवो की शहरो वाली, बस्तिया भी थोड़ी सी तो,आप दिखलाईये॥ नगरो के बीच वाली,बस्तीयो मे टूटी फूटी, सड़के तो नेताजी को,आप दिखलाईये॥ कचरे का ढेर चारो,ओर लगा हुआ है जो, बह रहा सड़को पे,पानी भी दिखाईये॥ चारो ओर घास उगी ,मच्छरो का जोर यहाँ, कांगरेस घास पूस,उनको दिखाईये॥  खुली है जो नालीयो मे ,गिरता है कचरा भी, नालीयो मे रुका हुआ,कीचड़ दिखाईये॥ कच्ची बस्तीयो के बीच ,फैल रहा कीचड़ है, रोशनी से हीन घर,उनको दिखाईये॥ पीने को तो पानी नही,टूटा हैण्डपम्प ऐक, खाली गागरी की आज,कतारे दिखाईये॥ गाँवो की जो सड़के है,शहरो को ही जोड़ती, नेताओ की कारे जरा...